शिक्षकों के लंबित वेतन लाभ पर फिर बात
जयपुर में शिक्षकों का एक पुराना हिसाब फिर सामने आया है। उनकी मांग सीधी है: जो वेतन लाभ लंबित पड़े हैं, उनका निपटारा हो, एमएसीपी उन्नयन समय पर मिलें, पदोन्नतियाँ रुकी न रहें, और बकाया का जो कच्चा-पक्का रिकॉर्ड है, वह साफ हो। साथ ही प्रतिनियुक्ति पदस्थापन की भी समीक्षा करने की बात उठी, क्योंकि काम एक जगह और पदस्थापन दूसरी जगह हो तो व्यवस्था में उलझन बढ़ जाती है। शिक्षा विभाग ने जल्दी कार्रवाई का भरोसा दिया है, और यही इस कहानी का मोड़ है। स्कूल के रोज़ के काम से जुड़ी यह बात सिर्फ पैसे की नहीं, सम्मान और स्थिरता की भी है। शिक्षकों का सीधा-सा कहना यही है: कक्षा में ध्यान तभी रहेगा जब कार्यालय की लंबित सूची भी ठीक हो। घणी देर से लटकी चीज़ों का असर घर और स्कूल दोनों पर पड़ता है, और इसलिए सब की नज़र अब स्वीकृति पर टिकी है.
