त्रिपोलिया बाजार में लाख और पीतल का जादू
त्रिपोलिया बाजार में चलोगे तो सबसे पहले रंग दिखता है, फिर आवाज़। लाख की चूड़ियाँ बेचने वाली दुकानों के सामने छोटी-छोटी थैलियों में लाल, गुलाबी, हरा और सुनहरा सा रंग सजा मिलता है। उँगलियों के बीच से निकलती चूड़ियाँ हल्की-सी खनक करती हैं, जैसे बाज़ार खुद मुस्कुरा दिया हो। थोड़ी दूर पीतल के बर्तनों की दुकान है, जहाँ लोटे, थाली, दीया और कलश धूप में चमक उठते हैं। यहाँ एक पीतल की लोटी ने सबका ध्यान इसलिए खींच लिया क्योंकि उस पर बारीक नक्काशी और मज़बूत छपाई थी। म्हारो जयपुर इसी में जीता है—पुराना बाज़ार, नई नज़र।
