त्रिपोलिया की घंटियाँ और जोरावर सिंह गेट
जोरावर सिंह गेट के पास त्रिपोलिया बाज़ार की गली में पीतल की घंटियाँ, थालियाँ और पूजा के छोटे सामान अब भी पुराने अंदाज़ में सजते हैं। दुकानदार भाईसाहब कहते हैं, यहाँ सिर्फ माल नहीं, याद भी बिकती है। सुबह से शाम तक खनक, टोकरा, मोलभाव और चाय की खुशबू मिलकर एक अलग ही बाज़ार का गीत बना देते हैं। यह वही इलाका है जहाँ मंदिर के लिए घंटी, घर के लिए थाली, और नई शादी के लिए छोटी पूजा की चीज़ें मिल जाती हैं। जोरावर सिंह गेट की छाया में खड़ी इन दुकानों ने त्रिपोलिया को सिर्फ खरीदारी की गली नहीं, बल्कि रीति-रिवाज की ज़िंदा पहचान बना दिया है। घणी देर तक यहाँ रुकने का मन करता है, क्योंकि हर खनक के पीछे एक कहानी छुपी होती है।
