त्रिपोलिया की लाख चूड़ियाँ, लखेरा हाथ का काम
त्रिपोलिया बाज़ार की तंग गली में भट्टी की गरमी, रंगों की चमक और चूड़ियों की खनक एक साथ चलती है। यहीं लखेरा समाज के कारीगर लाख को गरम करके गोल देते हैं, फिर हाथ से उसमें रंग, नक़्श और चमक भरते हैं। हर चूड़ी अलग लगती है, पर सारी में एक ही मेहनत बोलती है। खासकर शादी और त्योहार के दिनों में यहाँ के सेट जल्दी उठ जाते हैं। एक कारीगर बताता है कि एक सेट बनाने में लगभग 12 मिनट लगते हैं, इसलिए भाईसाहब, दाम सिर्फ़ माल का नहीं, हाथ की रफ़्तार का भी होता है। त्रिपोलिया की लाख चूड़ियाँ बस जेवर नहीं, जयपुर के बाज़ार का धड़कता काम हैं।
