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विश्वविद्यालयों को किताबी नहीं, ज़िंदगी वाली पढ़ाई देनी चाहिए

Universities ko kitaabi nahi, zindagi wali padhai deni chahiye

जगद्गुरु रामानंदाचार्य राजस्थान संस्कृत विश्वविद्यालय के आठवें दीक्षांत समारोह में ध्यान डिग्री से ज़्यादा उस सोच पर रहा जो डिग्री के बाद भी काम आए। राज्यपाल ने कहा कि विश्वविद्यालयों का काम सिर्फ पाठ्यक्रम पूरा करवाना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों को ऐसी पढ़ाई देना है जो जीवन से जुड़ी हो। मतलब, कक्षा का पाठ और घर-सामाजिक समझ एक ही रास्ते पर चलनी चाहिए। उनका संकेत सीधा था: जागरूकता, बौद्धिक क्षमता और विवेक — तीनों का संतुलन। जयपुर में ऐसे मौकों पर यह बात और भी ठीक बैठती है, क्योंकि यहाँ कॉलेज से निकलने वाला विद्यार्थी सिर्फ अंक नहीं, निर्णय लेने की समझ भी साथ ले जाता है। एक छोटी-सी बात, पर बात घणी गहरी थी — पढ़ाई का मतलब रटंत नहीं, दृष्टिकोण भी। और सच्ची बात यह है कि आज के समय में विश्वविद्यालय वही ज़्यादा याद रहता है जो किताब के बाहर की दुनिया समझा दे।

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