बापू बाज़ार का ₹20 शास्त्र
बापू बाज़ार में खरीदारी कम, नाटक ज़्यादा लगता है। एक टोपी उठाओ, दुकानदार कह देता है, “घणी महँगी नहीं, पर घणी सस्ती भी नहीं।” फिर ग्राहक बिलकुल गंभीर चेहरा बनाकर बोलता है, “भाईसाहब, इतने में तो कल ही मिल गया था।” बस, इसी बात से भाव का मैदान गरम। यहाँ ₹20 की छूट सिर्फ पैसा नहीं, इज़्ज़त का खेल है। दुकानदार दो मिनट और सोचता है, ग्राहक दो मिनट और अकड़ दिखाता है, और आसपास वाले भी मुफ़्त का शो देखते हैं। जयपुर की असली रूह यहीं है: थोड़ी मस्ती, थोड़ी नाक-भौं सिकुड़ना, और अंत में एक मुस्कान। पधारो बापू बाज़ार, जहाँ मोल-भाव भी एक रस्म है।
