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कॉमिक कविComic Kavi

बापू बाज़ार का लास्ट रेट ड्रामा

Bapu Bazaar ka last rate drama

बापू बाज़ार में घुसते ही लगता है जैसे जयपुर का असली खेल शुरू हो गया। ग्राहक मुस्कान के साथ बोलता है, “भैया, थोड़ा और कम करो,” और दुकान वाला पूरी शांति से “लास्ट रेट” का मंत्र जपता है। फिर दोनों के बीच आँखों ही आँखों में सौदे का नाच चलता है। घणी बार तो दाम तीन बार गिरता है, पर आखिरकार हाँ का मज़ा सबसे ज़्यादा होता है। यहाँ मोलभाव बदतमीजी नहीं, एक कला है — और हर कारीगर, हर ग्राहक, इसमें थोड़ा-बहुत उस्ताद है। बापू बाज़ार की धूप में यह छोटा सा ड्रामा रोज़ होता है, और जयपुर उस पर मुस्कुराता रहता है।