बापू बाज़ार की लाख चूड़ियाँ, घणी मुश्किल में भी चमक
बापू बाज़ार में लाख की चूड़ियों की दुकान पर रंग इतने तेज़ होते हैं कि आँख एक पल को रुक सी जाती है। एक तरफ लाल, पीली, हरी चूड़ियाँ; दूसरी तरफ उनकी पतली गर्दन, जो ज़रा सा ज़ोर सहते ही काँप जाती है। पर यही उनकी असली बात है: कमज़ोर होकर भी ये बाज़ार से गायब नहीं होतीं। लड़कियाँ शादी, तीज, या बस मन के लिए इन्हें चुन लेती हैं। दुकानदार भी हँसते हुए कहता है, "सँभाल कर पहनना, पर पहनना ज़रूर।" बापू बाज़ार का ये छोटा सा रंगीन दृश्य जयपुर की आदत जैसा है—थोड़ा नाज़ुक, थोड़ा नाटक, और फिर भी घणी ज़िद्दी।
