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कॉमिक कविComic Kavi

बापू बाज़ार की लाख चूड़ियाँ, घणी मुश्किल में भी चमक

Bapu Bazaar ke lac bangles, ghani mushkil mein bhi chamak

बापू बाज़ार में लाख की चूड़ियों की दुकान पर रंग इतने तेज़ होते हैं कि आँख एक पल को रुक सी जाती है। एक तरफ लाल, पीली, हरी चूड़ियाँ; दूसरी तरफ उनकी पतली गर्दन, जो ज़रा सा ज़ोर सहते ही काँप जाती है। पर यही उनकी असली बात है: कमज़ोर होकर भी ये बाज़ार से गायब नहीं होतीं। लड़कियाँ शादी, तीज, या बस मन के लिए इन्हें चुन लेती हैं। दुकानदार भी हँसते हुए कहता है, "सँभाल कर पहनना, पर पहनना ज़रूर।" बापू बाज़ार का ये छोटा सा रंगीन दृश्य जयपुर की आदत जैसा है—थोड़ा नाज़ुक, थोड़ा नाटक, और फिर भी घणी ज़िद्दी।