ब्लू पॉटरी और घर का ‘बस थोड़ा सावधानी से’
ब्लू पॉटरी देखने में इतनी सुंदर लगती है कि घर वाले सीधा उसे शेल्फ पर रख देते हैं, पर उसके पास पहुँचते ही बोलते हैं, “बस थोड़ा सा सावधानी से।” फिर फूलदान हो या कटोरी, उसके आसपास का हिस्सा छोटा-सा निषेध क्षेत्र बन जाता है। बच्चे हाथ बढ़ाएँ तो माँ की नज़र, और सफाई वाले दिन तो घणी टेंशन। जयपुर में यह कला सिर्फ़ खूबसूरती नहीं, अनुशासन भी सिखाती है। सांगानेर की इस पहचान को घर में रखना मतलब सौंदर्य और संभाल का साथ। कारीगर रंग बनाता है, और घर वाले हर रोज़ नया बचाव। सच्ची, ब्लू पॉटरी जयपुर में सजावट से ज़्यादा परिवार की परीक्षा बन जाती है।
