ब्लू पॉटरी: नाज़ुक दिखे, ग़ज़ब टिके
जयपुर की ब्लू पॉटरी पहली नज़र में इतनी नाज़ुक लगती है कि आदमी साँस भी धीरे ले। नीला रंग, सफेद बेल-बूटे, और ऐसा एहसास जैसे बस उसे रैक पर रखो और दुआ करो। पर सच्ची बात यह है, इसका अंदाज़ नाज़ुक ज़रूर है, पर काम बड़ा मज़बूत है। सांगानेर और उसके आसपास के कारीगर इसे ऐसे बनाते हैं जैसे मिट्टी को राजसी प्रशिक्षण दे दिया हो। घणी बार लोग सोचते हैं, ‘बस हाथ लगा और टूट गई’, पर यह प्याली और प्लेट रोज़ के झटके सह लेती है। ब्लू पॉटरी का यही चमकदार झूठ है—दिखती नाज़ुक, चलती पूरी मज़बूत। पधारो, जयपुर की कला भी कभी-कभी आँखों को चकमा और काम में सबको पीछे छोड़ देती है।
