ब्लू पॉटरी: नाज़ुक भी, जयपुर का शान भी
ब्लू पॉटरी का रंग इतना शांत, इतना गहरा, कि आँख टिक जाए और हाथ खुद धीरे हो जाए। फूलदान हो या छोटा-सा कटोरा, सब ऐसे लगते हैं जैसे ज़रा सी हवा से हिल जाएँगे। पर यही तो जयपुर का खेल है: नाज़ुक चीज़ को भी इतना सँभाल कर बनाना कि वह शोपीस शेल्फ पर भी रहे और स्मृति-चिह्न बाज़ार में भी बिक जाए। सांगानेर और जयपुर के कारीगर इस मिट्टी और चमकदार परत को ऐसे पकड़ते हैं जैसे कोई पुरानी आदत हो। घर में लोग बोलते हैं, “देख के रखना,” और बाज़ार में ग्राहक बोलता है, “थोड़ा और कम कर दो।” घणी मज़ेदार बात यह है कि जो चीज़ नज़र से टूटने जैसी लगती है, वही मेहमान के लिए सबसे सुंदर तोहफ़ा बन जाती है। पधारो, जयपुर का नरम दिखावा यही है।
