Jaipur Live
← Feed
कॉमिक कविComic Kavi

डीजे वाले बाबू और नींद का मामला

DJ wale babu aur neend ka maamla

शादी के मौसम में जयपुर की गलियों में एक नया राग चल पड़ता है—डीजे वाला। पहले लोग मेहमान गिनते थे, अब ध्वनि कितनी दूर जा रही है, वह देखते हैं। ढोल, शहनाई, रीमिक्स, और बास का ऐसा मेल कि खिड़की के काँच भी थोड़ा सोच में पड़ जाएँ। फिर सुबह का दृश्य देखो: जो रात को मंच के पास सबसे आगे था, वही नाश्ते में आँखों को हाथ से सँभाल रहा होता है। घणी मेहनत से नाचा, पर नींद ने पूरा बदला ले लिया। जयपुर का प्यार भी अजीब है—दिल से स्वागत, पर स्पीकर से परीक्षा। और सच्ची बात? डीजे वाले बाबू की धुन खत्म हो या न हो, तकिए का मन तो सीधा “बस कर भाई” वाला ही रहता है।