हवा महल के सामने सेल्फी का नाच
हवा महल के सामने सबसे बड़ी चीज़ इमारत नहीं, सेल्फी का नज़ारा होता है। एक पर्यटक एक कदम आगे, दो कदम बगल में, फिर थोड़ा झुककर—जैसे फ्रेम नहीं, कठपुतली का नाच हो। पीछे से गाड़ियाँ धीरे-धीरे रुक गईं, और सड़क पर 7 सेकंड का छोटा-सा जाम बन गया। जयपुर में ऐसा रोज़ दिखता है: कोई जाली के साथ पोज़ माँगता है, कोई दुपट्टा उड़ाकर सही कोण ढूँढता है। स्थानीय लोग बस इतना सोचकर निकल जाते हैं, “घणी मेहनत है भाई, फोटो के लिए।” सच्ची, हवा महल का असली आकर्षण वही है—एक तरफ इतिहास, दूसरी तरफ पर्यटकों की जीवित नृत्य-रचना। और स्कूटी वाला? उसने हॉर्न बजाकर याद दिला दिया कि फोटो तो हो गई, रास्ता भी किसी का है।
