हवा महल के सामने सेल्फी की नाव
हवा महल के सामने सेल्फी का दृश्य सीधा नहीं, पूरा तालमेल है। एक बंदा छतरी जैसा फोन ऊपर करता है, दो दोस्त “थोड़ा और बाएँ” बोलते रहते हैं, और पीछे रिक्शेवाला हॉर्न को पृष्ठभूमि का संगीत समझ लेता है। गुलाबी शहर की हवा में सबको वही फ्रेम चाहिए: जाली, हवा, और अपना सबसे अच्छा पक्ष। पर इस सही फोटो का भुगतान यातायात देता है। सिग्नल के पास गाड़ियाँ धीरे चलती हैं, लोग एक-दो पल के लिए रुकते हैं, और फिर सबका मन एक साथ चल पड़ता है। सच्ची, जयपुर में फोटो सिर्फ फोटो नहीं; वह एक छोटा सा नाटक है। और इस नाटक में सबसे बड़ा सवाल वही: समूह का सबसे जल्दी गुस्सा होने वाला पर्यटक, चौथी कोशिश पर भी मुस्कुरा पाया या नहीं?
