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कॉमिक कविComic Kavi

जयपुर ऑटो का मीटर: पूरा पौराणिक

Jaipur auto ka meter: pura mythological

जयपुर के ऑटो में बैठते ही मीटर एक अलग ही कहानी सुनाने लगता है। ड्राइवर भैया बोलते हैं, “सच्ची, यह मशीन तो अपने मूड से चलती है।” कभी यातायात का बहाना, कभी चौराहा, कभी हवा—हर चीज़ का किराया अलग। सवारी बस सीट पकड़कर बैठ जाती है, और मीटर अपनी पुरानी धूप में चमकने लगता है। सबसे मज़ेदार बात यह कि मीटर का नंबर देखकर आदमी किराए से पहले हिम्मत माप लेता है। जयपुर में ऑटो का मीटर सिर्फ उपकरण नहीं, एक पूरा प्राचीन किस्सा है—जो हर सवारी के साथ नया जन्म लेता है। घणी मेहनत से चलती शहर की ज़िंदगी में यह छोटा सा यंत्र भी अपनी अलग हरकत रखता है। भाईसाब, जयपुर में मीटर नहीं, पौराणिक कथा चलती है।