जयपुर की सुबह, घंटी और चाय का जादू
सुबह जयपुर में पहले घंटी सुनाई देती है, फिर चाय की खुशबू। पुरानी बस्ती की तंग गलियों में मंदिर के पास एक छोटा सा ठेला लगता है, जहाँ केतली की सीटी और गिलास की खनक मिलकर अलग ही राग बनाती है। धूप अभी नरम होती है, इसलिए लोग थोड़ी देर खड़े होकर गरम चाय पीते हैं। इस समय शहर का मिज़ाज भी अलग होता है। स्कूल जाते बच्चे, दुकान खोलते भाई-साहब, और सुबह-सवेरे टहलने वाले सब एक ही रफ्तार में चल पड़ते हैं। घणी सर्दी हो या हल्की गर्मी, जयपुर की सुबह का असली रंग यही है: शांत भी, ज़िंदा भी। म्हारे शहर में दिन का पहला स्वाद अक्सर चाय से ही शुरू होता है।
