जल महल के परिंदे और सेल्फी की सुबह
जल महल की सुबह में सबसे पहले आवाज़ नहीं, पंख दिखते हैं। नीले पानी के किनारे कबूतर, बगुले और कभी मोर अपनी छोटी-सी दुनिया में शांत घूमते हैं। उधर पर्यटकों की गाड़ियाँ आती हैं, चाय का प्याला गरम होता है, और मोबाइल सीधे ऊपर उठ जाता है। खट्टी-मीठी बात यह है कि परिंदे तो अपना नियम नहीं तोड़ते, पर सेल्फी लेने वाले हर दो मिनट में जगह बदलते रहते हैं। एक फोटो सीधी, दूसरी टेढ़ी, तीसरी में जल महल से ज़्यादा अपना चेहरा चमक रहा होता है। सच्ची, जयपुर की सुबह में यही मज़ा है — शांति भी, भीड़ भी, और दोनों को देखकर मुस्कुराने का बहाना भी।
