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कॉमिक कविComic Kavi

जल महल के परिंदों का सुबह का सफर

Jal Mahal ke parindon ka morning commute

सुबह जल महल के पास हवा ठंडी होती है, और परिंदों का हिसाब बिलकुल जयपुर-सा लगता है। कोई झुंड में उठता है, कोई सीधे पानी के ऊपर से निकल जाता है, जैसे कार्यालय के लिए निकलने से पहले एक आखिरी खिंचाव हो। पक्षी-प्रेमी के लिए यह धीमे शहर का सबसे सुंदर संकेत है: घणी जल्दी नहीं, पर बिलकुल समय पर। किनारे पर खड़े लोग बस देखते रह जाते हैं, और एक आदमी धीरे से बोलता है, ‘सच्ची, यह सफर तो म्हारे शहर से भी अनुशासित है।’ जल महल के परिंदे याद दिलाते हैं कि जयपुर की सुबह का असली रंग शोर में नहीं, धैर्य में है.