जल महल के सामने शाम का ठहराव
शाम होते ही आमेर रोड का शोर एक तरफ सरकने लगता है। मानसागर झील के किनारे लोग रुक जाते हैं — कोई स्कूटर से उतर कर बस दीवार पर टिक जाता है, कोई परिवार छोटी-सी चाय के साथ जल महल को देखता रहता है। पानी के ऊपर हवा चलती है तो कबूतर एक साथ उठते हैं, जैसे सफेद धुआँ-सा। साइकिल चलाने वाले धीरे हो जाते हैं, और ठेले वाले भी आवाज़ कम कर देते हैं। इस जगह का मज़ा किसी एक दृश्य में नहीं, बल्कि उस बीच के ठहराव में है। जयपुर की भाग-दौड़ के बीच, यह वह कोना है जहाँ घर जाने से पहले दिल भी थोड़ा रुकता है।
