जल महल पर ‘बस एक फोटो और’ का जादू
जल महल के सामने शाम ढलती है तो पैदल पथ पर एक अलग ही नाटक शुरू हो जाता है। एक आदमी कैमरा ठीक करता है, पीछे से दो लोग चित्र में घुस आते हैं, और कोई न कोई बोल देता है, “म्हारे को भी एक फोटो दे दो।” फिर असली हास्य आता है: “बस एक फोटो और” बोलने वाले खुद ही चार फोटो खिंचवा चुके होते हैं। पानी पर पड़ती हल्की रोशनी, ठंडी हवा, और पीछे से चलती लोगों की सीधी कतार — बस यही जयपुर का सूर्यास्त क्रम है। ट्रै का मतलब यहाँ यातायात नहीं, धैर्य की परीक्षा है। घणी देर तक खड़े रहकर भी लोग खुश रहते हैं, क्योंकि जल महल के सामने सेल्फी का हिसाब कभी एक से पूरा ही नहीं होता।
