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आज की जयपुरAaj Ki Jaipur

झालाना की सुबह, शेर और शहर का किनारा

Jhalana ki subah, sher aur shehar ka kinaara

झालाना की सुबह अलग ही लगती है। अरावली की पहाड़ियों के बीच हवा ठंडी होती है, और जीप की हल्की घरघराहट के साथ-साथ घास पर ओढ़ आई धुंध भी उठने लगती है। यहीं जयपुर का वह कोना है जहाँ शहर की मशीन धीमी पड़ जाती है और जंगल की साँस सुनाई देती है। लेकिन सफारी का सुख सिर्फ शेर देखने में नहीं, उस इंतज़ार में भी है। कभी पत्थर पर पाँव का निशान, कभी क़ीकर के नीचे हिला हुआ सा साया, कभी सिर्फ पीली आँखों का एहसास। गाइड ने 3 अलग निशान गिने—पाँव, ताज़ी मिट्टी, और एक मुड़ा हुआ रास्ता—और फिर बोला, “बस अभी यहीं था।” कसम से, झालाना में जयपुर का एक नया चेहरा दिखता है: घना भी, सीधा भी, और थोड़ा सा ज़िद्दी भी।

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