जोधपुर की नीली दीवार, हाथ भी नीले
मेहरानगढ़ की छाया में पुरानी दीवार पर एक परत लगती है, और फिर लगता है कि रंग ने काम कम, मस्ती ज़्यादा कर दी। गलियों में जो लोग नीला रंग-चूना लगाने का काम करते हैं, उनके हाथ ऐसे दिखते हैं जैसे नील ने सीधे हाथ मिला लिया हो। “बस एक परत,” का वादा होता है, पर फिर छोटे बच्चे से लेकर बड़े उस्ताद तक सबके कपड़े, नाखून और कभी गाल भी नीले हो जाते हैं। जोधपुर की यह पहचान सच्ची है: सुंदर भी, ज़िद्दी भी। और घणी मज़ेदार बात यह कि घर जाकर सब बोलते हैं, “आज तो रंग ने म्हारे साथ पूरा काम लगा दिया।”
