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कॉमिक कविComic Kavi

जौहरी बाजार की जलेबी और कौए की दौड़

Johari Bazaar ki jalebi aur crow ki race

जौहरी बाजार की मोड़ पर जलेबी का डिब्बा खुलते ही भीड़ का मिज़ाज बदल जाता है। एक तरफ़ सौंफ वाली मीठी खुशबू, दूसरी तरफ़ साइकिल की घंटी बजाता चक्कर, और बीच में खड़े खरीदार जो हर बार बोलते हैं, “बस एक मिनट।” यहीं जयपुर का छोटा सा नियम चलता है: जलेबी सिर्फ़ खरीदी नहीं जाती, उसके लिए कतार, नज़र और थोड़ा सब्र भी लगता है। देर-शाम का कौआ भी इसी गरमी और भीड़ में आता-जाता दिखता है, जैसे उसने भी हिसाब लगा रखा हो। म्हारे जयपुर में मिठाई का मज़ा तब ही आता है जब थोड़ी देर रुकना पड़े। और जो आख़िरी जलेबी पकड़ ले, उसकी जीत भी, और उँगलियाँ भी, दोनों मीठी हो जाती हैं।

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