जौहरी बाजार की जलेबी और कौए की दौड़
जौहरी बाजार की मोड़ पर जलेबी का डिब्बा खुलते ही भीड़ का मिज़ाज बदल जाता है। एक तरफ़ सौंफ वाली मीठी खुशबू, दूसरी तरफ़ साइकिल की घंटी बजाता चक्कर, और बीच में खड़े खरीदार जो हर बार बोलते हैं, “बस एक मिनट।” यहीं जयपुर का छोटा सा नियम चलता है: जलेबी सिर्फ़ खरीदी नहीं जाती, उसके लिए कतार, नज़र और थोड़ा सब्र भी लगता है। देर-शाम का कौआ भी इसी गरमी और भीड़ में आता-जाता दिखता है, जैसे उसने भी हिसाब लगा रखा हो। म्हारे जयपुर में मिठाई का मज़ा तब ही आता है जब थोड़ी देर रुकना पड़े। और जो आख़िरी जलेबी पकड़ ले, उसकी जीत भी, और उँगलियाँ भी, दोनों मीठी हो जाती हैं।
