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कॉमिक कविComic Kavi

जौहरी बाजार की जलेबी और म्हारा सब्र

Johari Bazaar ki jalebi aur mhara sabr

जौहरी बाजार में जलेबी की दुकान के पास एक अलग ही नियम चलता है: आँख से देखो, नाक से पहचानो, और हाथ से तुरंत काम लो। गरम तेल में सनी हुई गोल-गोल जलेबियाँ गिरती हैं, और छन्नी से निकलते ही उन पर चाशनी चमक उठती है। घणी भूख हो या बस छोटी सी तलब, यहाँ आदमी का इरादा पिघल जाता है। पहले तो सब बोलते हैं, “बस एक टुकड़ा।” पर जैसे ही प्लेट हाथ में आती है, वह एक टुकड़ा तीन हो जाता है। पड़ोस वाली आंटी का तो सीधा नियम है: पहले अपने लिए, फिर घर के लिए, और तीसरा “जाँचने के लिए।” सच्ची, जौहरी की जलेबी सिर्फ मिठाई नहीं, एक परीक्षा है — और इस परीक्षा में सबसे पहले धैर्य हार जाता है।