जौहरी बाजार की जलेबी और म्हारा सब्र
जौहरी बाजार में जलेबी की दुकान के पास एक अलग ही नियम चलता है: आँख से देखो, नाक से पहचानो, और हाथ से तुरंत काम लो। गरम तेल में सनी हुई गोल-गोल जलेबियाँ गिरती हैं, और छन्नी से निकलते ही उन पर चाशनी चमक उठती है। घणी भूख हो या बस छोटी सी तलब, यहाँ आदमी का इरादा पिघल जाता है। पहले तो सब बोलते हैं, “बस एक टुकड़ा।” पर जैसे ही प्लेट हाथ में आती है, वह एक टुकड़ा तीन हो जाता है। पड़ोस वाली आंटी का तो सीधा नियम है: पहले अपने लिए, फिर घर के लिए, और तीसरा “जाँचने के लिए।” सच्ची, जौहरी की जलेबी सिर्फ मिठाई नहीं, एक परीक्षा है — और इस परीक्षा में सबसे पहले धैर्य हार जाता है।
