जौहरी बाज़ार की पान-बेड़ी, शादी का असली संकेत
जौहरी बाज़ार की शादी में पान-बेड़ी सिर्फ खाने की चीज़ नहीं, एक पूरी तहज़ीब है। पहले बड़ा-सा थाली वाला आदमी सुपारी बढ़ाता है, सामने वाला दो बार “नहीं रे, बस” बोलकर भी लेता है, क्योंकि यही तो रस्म है। फिर मुड़े कागज़ में पान आता है, और उसके साथ आती है बात की नरमी। यहाँ पान का पत्ता बस मीठा स्वाद नहीं देता, वह इज़्ज़त का संकेत होता है। पान लेने का तरीका, मना करने का अंदाज़, और कौन पहले पेश करे — सब लिखा नहीं होता, पर सबको पता होता है। घणी सच्ची बात यह है: जयपुर में कभी-कभी एक पान, दो मुस्कान से ज़्यादा काम कर जाता है। शादी का असली रंग वही है।
