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कॉमिक कविComic Kavi

जौहरी बाजार की प्याज कचौरी और पहला काट

Johari Bazaar ki pyaaz kachori aur pehla kaat

जौहरी बाजार में प्याज कचौरी सिर्फ नाश्ता नहीं, एक छोटी सी समझौता-बाज़ी है। बाहर की परत इतनी नाज़ुक कि उँगली से ही टूट पड़े, और अंदर की तीखी प्याज-भराई सीधे नाक तक बात पहुँचा दे। पहला काट लगता है, तो बंदा समझ जाता है कि अब सिर्फ खाना नहीं, सँभालना भी है। यहीं असली खेल शुरू होता है: एक हाथ में कचौरी, दूसरे में धीरज। गाड़ियाँ, राह चलते लोग, और जौहरी बाजार की भागदौड़ — सबके बीच म्हारो यह नाश्ता अपनी मर्जी चलाता है। सच्ची, प्याज कचौरी का पहला-काट समझौता जयपुर को याद दिला देता है कि कुछ चीज़ें बैठकर ही जीती जाती हैं। और जो आदमी चलती दुकान से भी बिना गिराए खा ले, उसे जयपुर सीधे नायक मानती है।