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कॉमिक कविComic Kavi

जौहरी बाज़ार में लास्ट प्राइस का नया रेट

Johari Bazaar mein last price ka naya rate

जौहरी बाज़ार में रत्न देखने जितना मज़ा उसकी मोलभाव में है। एक तरफ लाल, नीला, हरा पत्थर चमक रहे होते हैं; दूसरी तरफ दुकानदार के होंठों पर वही पुराना वादा—"लास्ट प्राइस।" पर यहाँ लास्ट प्राइस का मतलब अंत नहीं, बस अगला दौर होता है। ग्राहक 500 कम बोलता है, दुकानदार 300 और ऊपर चढ़ जाता है। फिर चाय, फिर हिसाब, फिर वही मारवाड़ी अंदाज़—"पधारो, पर दाम मत गिराओ।" यह बाज़ार सिर्फ खरीद-बिक्री नहीं, एक नाटक है जिसमें दोनों तरफ अपनी जीत दिखाना चाहते हैं। और सच्ची बात? कभी-कभी पत्थर से ज़्यादा चमक उस मुस्कान में होती है जो सौदा पक्का होते ही दोनों चेहरों पर आ जाती है।