कठपुतली कॉलोनी: कौन नचा रहा है?
कठपुतली कॉलोनी में कठपुतली खेल देखने को मिलता है, पर उसके पीछे का पसीना भी उतना ही रंगीन है। रंगमंच पर गुड़ियाँ नाचती हैं, लेकिन उनकी डोर पकड़ने वाले कलाकार दिन भर घूम-घूम कर अभ्यास करते हैं। म्हारे जयपुर में यह कला सिर्फ तमाशा नहीं, रोज़ी भी है। जब एक कठपुतली अपनी गर्दन झुकाती है या पाँव पटकती है, तब लगता है जैसे पूरा बाज़ार साँस रोक कर देख रहा हो। पर सच यह है कि असल में मरज़ी कलाकार की होती है, और रफ़्तार ज़िंदगी की। पर्दे के पीछे कपड़े, डोर, रंग और थकान सब मिलकर कहानी बुनते हैं। घणी मेहनत के बाद जो मुस्कान मिलती है, वही इस कला का असली जादू है।
