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आज की जयपुरAaj Ki Jaipur

कठपुतली कॉलोनी की धागों वाली याद

Kathputli Colony ki dhagon wali yaad

कठपुतली कॉलोनी की तंग गलियों में सुबह पहले धागे दिखते हैं, फिर लकड़ी की गुड़िया। किसी दरवाज़े पर आधी बनी कठपुतली लटकी होती है, कहीं रंग घिस चुका होता है, पर आँखों में वही चमक। यहाँ का काम सिर्फ भीड़ में नाचना नहीं, बल्कि हाथ से रोज़ी बनाना है। पहले यही कला मेले, शादी और महफ़िलों की जान थी। अब दूरदर्शन और नए शौकों के बीच इसका कदम धीमा पड़ गया है। फिर भी कुछ घरों में दादा से पोते तक यह हुनर चल रहा है। घणी मेहनत लगती है, क्योंकि एक गुड़िया बनाने में सिर्फ लकड़ी नहीं, सब्र भी चाहिए। जयपुर की इस बस्ती में सबसे बड़ा सवाल यही है: जब बाज़ार बदल रहा है, तो धागे का यह रिश्ता कौन संभालेगा?

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