कठपुतली कॉलोनी में रात का जादू
कठपुतली कॉलोनी में दिन ढलते ही घरों के बाहर छोटी सी मंच-व्यवस्था जम जाती है। रंग-बिरंगे कपड़े, लकड़ी के पुतले, और डोरियों को संभालते हाथ — यह सब मिलकर जयपुर की पुरानी कला को जिंदा रखते हैं। यहाँ का हर घर जैसे एक छोटे कारीगर का घर है, जहाँ बच्चे भी इसी काम को देखकर बड़े होते हैं। शाम का प्रदर्शन शुरू होता है, और ढोलक की थाप के साथ कहानी आगे बढ़ती है। लोग कभी हँस देते हैं, कभी चुप हो जाते हैं। घणी सच्ची बात यह है, यहाँ कठपुतली सिर्फ मनोरंजन नहीं, रोज़ी भी है। जो नई कठपुतली अभी मंच पर नहीं आई, वह अक्सर किसी नए किरदार की तैयारी होती है — और कभी किसी परिवार के नए सपने की भी।
