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कॉमिक कविComic Kavi

कठपुतली कॉलोनी: डोर, खामोशी और हँसी

Kathputli Colony: Strings, Silence Aur Hansi

कठपुतली कॉलोनी में कठपुतली बनाने वालों के हाथ बस लकड़ी और डोर नहीं, पूरी अदा गढ़ते हैं। एक तरफ साँस रोके बैठा किरदार, दूसरी तरफ पीठ के पीछे छुपा हाथ — और बीच में दर्शकों की हँसी। यहाँ खामोशी भी दृश्य का हिस्सा है; लगता है जैसे सब पहले से तैयार है, बस एक झटके का इंतज़ार है। जब कठपुतली थोड़ी टेढ़ी होती है, तो समझो मज़ाक अब आया। कोई बोलता नहीं, फिर भी सब समझ जाते हैं: यह जयपुर का अपना नाटक है, जहाँ डोर ही संवाद है। म्हारे यहाँ धैर्य का मतलब भाषण नहीं, अभ्यास होता है। और सच्ची बात, ऐसी ही एक नरम हँसी से दिन थोड़ा हल्का हो जाता है।