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कॉमिक कविComic Kavi

कठपुतली का मंच, और जयपुर की बात

Kathputli ka stage, aur Jaipur ki baat

पुराने जयपुर के बाजार में कठपुतली का मंच देखकर लगता है जैसे शहर ने अपनी बात धागों में बाँध दी हो। एक गुड़िया हाथ उठाती है, दूसरी थोड़ी रुकती है, और बीच में जो खाली पल पड़ता है, उसमें पूरी बस्ती की हँसी आ जाती है। यह खट्टर-मिट्ठी कला सिर्फ तमाशा नहीं, समाज का छोटा सा आईना है। बड़ा काम करती है यह छोटी सी कठपुतली: बिना नाम लिए सब कह देती है। मोहल्ला हो या बाजार, कर हो या लाइन में खड़े लोग, टिप्पणी सीधे निशाने पर लगती है। पधारो रे, जयपुर में कभी-कभी एक लकड़ी की गुड़िया अख़बार से ज़्यादा साफ़ बोल देती है। और हाँ, असली जादू तब होता है जब कलाकार का एक नाटकीय विराम पूरी भीड़ को चुप करा दे।