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कॉमिक कविComic Kavi

लस्सी का गिलास या झाग का महल?

Lassi ka glass ya foam ka mahal?

लस्सीवाला के बाहर गिलास हाथ में आते ही जयपुर का हिसाब-किताब शुरू हो जाता है। नीचे ठंडी, मीठी लस्सी, और ऊपर इतना झाग कि लगता है गिलास ने सफ़ेद टोपी पहन ली। पहला निशाना वही ऊपर का हिस्सा होता है; फिर नीचे का घूँट धीरे-धीरे काम करता है। यही तो इस शहर की खट्टी-मीठी बात है, भाई। कोई कहता है झाग अलग मज़ा देता है, कोई बोलता है असली पैसा तरल में है। पर लस्सीवाला पर खड़े होकर लगता है कि अनुपात का जवाब गणित की कॉपी में नहीं, लस्सी के गिलास में मिलता है। घणी लस्सी, घणा मूड — और एक उँगली झाग, जो पूरे गिलास को फोटो-योग्य बना दे।