लेहरिया: जयपुर की गर्मी का रंग
जयपुर की धूप जब तेज़ हो, लेहरिया का रंग और भी चमक उठता है। पतली तिरछी धारियाँ, केसरिया और रसभरी के साथ, दुपट्टों, साफ़ों और ओढ़नियों पर ऐसे चलती हैं जैसे हवा ने खुद ब्रश पकड़ लिया हो। सांगानेर और जयपुर के कारीगर रंग चढ़ाने, बाँधने और सुखाने में धैर्य रखते हैं; एक छोटी सी गलती पूरी लकीर बिगाड़ सकती है। इस काम में मशीन से ज़्यादा हाथ की समझ बोलती है। घणी मेहनत के बाद जो नतीजा आता है, वह सिर्फ कपड़ा नहीं, जयपुर की गर्मियों की पहचान होता है। म्हारे यहाँ लेहरिया पहनना साधी बात नहीं, रंग को इज़्ज़त देना है।
