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कॉमिक कविComic Kavi

मकर संक्रांति: छत पर असली संघर्ष

Makar Sankranti: Chhat Par असली Sangharsh

जयपुर की छत पर मकर संक्रांति का दृश्य सीधा नहीं होता। नीचे गलियों में काई पो छे चल रहा होता है, और ऊपर छत पर तीन चीज़ें सबसे बड़ी होती हैं: मज़बूत डोर, पहला कट, और ठंड के बाद बची हुई पूरी। सच्ची, यहीं असली संघर्ष होता है। कोई छोटे भाई को डोर पकड़ाकर खुद किनारे से निगरानी करता है, कोई “बस एक और पतंग” बोलकर पूरी रील अपनी तरफ खींच लेता है। और जो पूरी की थाली होती है न, उस पर भी घणी नज़र रहती है—कौन ने सबसे बड़ा टुकड़ा उठाया, यह पूरी छत याद रखती है। जयपुर की यह छत वाली राजनीति खट्टी-मीठी है: हवा में पतंग, और मन में हिसाब।