एम.आई. रोड की सुबह: चाय या कचोरी?
एम.आई. रोड पर सुबह का दृश्य सीधा-सादा नहीं होता। चाय वाले के पास कुल्हड़ से उठती भाप, और बगल में कचोरी वाली थैली से मसाले की खुशबू — बस, फिर शुरू होती है रोज़ की अदालत की सुनवाई। कोई कहता है, पहले चाय; कोई बोलता है, बिना कचोरी सुबह अधूरी। एक अंकल तो हमेशा दो कचोरी और एक चाय का हिसाब रखते हैं, जैसे घणी पुरानी व्यवस्था हो। यहीं जयपुर की मस्ती है, भाया। न कोई बड़ा शोर, न लंबी भाषणबाज़ी — बस कतार, पसंद और थोड़ा-सा प्यार। और हाँ, सबसे दिलचस्प वह पल होता है जब अगला आदमी बोलता है: “म्हारे लिए चाय पहले।” इस एक लाइन से पूरी कतार का मिज़ाज बदल जाता है।
