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लोक फाइल्सLok Files

मौलेला की मिट्टी से उगते श्राइन

Molela ki mitti se ugte shrin

मौलेला, राजसमंद के पास, एक ऐसा गाँव है जहाँ मिट्टी सिर्फ बर्तन नहीं, श्राइन बन जाती है। कुम्हार पहले छोटी सी चपटी पट्टी तैयार करते हैं, फिर उस पर हाथ से उभार बनाते हैं — देव, घोड़ी, सवार, और गाँव के जीवन के छोटे-बड़े निशान। यह काम सांचे से कम, याद से ज़्यादा होता है। यहाँ की टेराकोटा पट्टिकाएँ अपने आप में एक छोटा मंदिर लगती हैं। लोग इन्हें घर, चबूतरे और देव-स्थानों के लिए ले जाते हैं। घणी मेहनत के बाद जो लाल मिट्टी धूप में सूखती है, उसमें एक सीधी सच्चाई होती है। पधारो बोले तो ठीक, पर मौलेला की मिट्टी बोलती है — म्हारे हाथ से बनी चीज़ बाज़ार से आगे, रीति में ज़िंदा रहती है।