नई सड़क का दुपट्टा और 'कैज़ुअल' नाटक
नई सड़क के बंधेज़ बाज़ार में कपड़े कम, अंदाज़ ज़्यादा मिलता है। एक दुपट्टा हल्का सा घूमे तो पूरा सौदा कर लेता है: लाल, नीला, पीला, और बीच में वह घणी सी बंधेज़ जिसमें नज़र अटक जाए। दुकानदार फिर भी सीधा बोल देता है, "अरे, यह तो कैज़ुअल है।" कैज़ुअल का मतलब यहाँ बस इतना है कि पहन लो, और लोग पूछने लगें, कहाँ से लिया? खासकर शाम के समय, जब रोशनी कपड़े पर पड़ती है और हर छपाई थोड़ी और चमकने लगती है। नई सड़क का यही जादू है: जो चीज़ दिखने में सीधी लगती है, वह पहनने पर पूरी कहानी बन जाती है। म्हारे यहाँ कैज़ुअल भी थोड़ा नखरे वाला होता है।
