पान की गद्दी: जयपुर का शाम वाला न्यूज़ रूम
पान की गद्दी पर शाम आते ही जयपुर का अलग ही समाचार-घर खुल जाता है। एक तरफ मीठे पान का डिब्बा, दूसरी तरफ सादे की माँग, और बीच में छोटा-सा स्टूल — बस वही आगे की सीट। मोहल्ले के लोग आते हैं, पान लेते हैं और अपनी बात भी छोड़ जाते हैं। कोई बोलता, “भाई, आज तो चौराहे पर बहुत गर्मी थी,” कोई कहता, “कल वाला हिसाब अभी तक बाकी है।” गद्दी वाला सब सुनता है, पर जवाब कम देता है। घणी शांति से पत्ती लपेटता रहता है, जैसे जयपुर की पूरी शाम उसी के हाथ में बँधी हो। म्हारे यहाँ पान सिर्फ पान नहीं, छोटी-सी सामाजिक सूचना है। और जो स्टूल पर बैठ गया, समझो उसने शहर का असली बुलेटिन पकड़ लिया।
