पाँच बत्ती की सुबह, चाय और पहला कदम
पाँच बत्ती की सुबह जल्दी जागती है, सच्ची। पुरानी बस्ती की दुकानों के ऊपर शटर बस आधे उठते हैं, और रेहड़ी वाले अभी स्टील की केतली साफ कर रहे होते हैं। चाय का गिलास, बिस्कुट का डिब्बा, और सड़क पर पहली स्कूटी — बस इतने से ही दिन का रंग तय हो जाता है। यहाँ पहला कदम सिर्फ गाड़ी का नहीं होता; वह स्कूल जाते बच्चे का, दफ्तर को निकलते आदमी का, और चाय के पहले घूँट का होता है। एक चायवाला हँसकर बोलता है कि सुबह का असली हिसाब पहली गिलास से चलता है। पाँच बत्ती पर यह छोटी सी रफ्तार जयपुर को धीरे-धीरे खोलती है। घणी देर तक जो शहर नींद में लगता है, वही यहीं से साँस लेता हुआ नज़र आता है।
