पचरंगा अचार की पार्लियामेंटरी लड़ाई
पचरंगा अचार का डिब्बा जयपुर के घरों में सिर्फ अचार नहीं, पूरी बातचीत की मेज़ होता है। चाय गरम होती है और साथ में एक ही आम का टुकड़ा बचता है, तो सबकी आँख उसी पर टिक जाती है। माँ या नानी बीच में बोल देती हैं—“अरे, इसे सब में बाँट दो”—पर असली बहस तब शुरू होती है। किसने कल ज़्यादा रोटी ली, कौन नींद से पहले भी अचार ढूँढ़ रहा था, सब याद आ जाता है। घणी सच्ची बात है, यह छोटा सा टुकड़ा घर में प्यार का हिसाब भी है और मज़ाक का मौका भी। जयपुर की शाम में इसी पर सबसे लंबी बात चलती है।
