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कॉमिक कविComic Kavi

पचरंगा पापड़ और छत की सनबाथ

Pachranga papad aur छत की सनबाथ

छत पर पापड़ सुखाना जयपुर की पुरानी कला है। धूप तेज हो तो घर की औरतें और दादियाँ पतली परतों को ऐसे संभालती हैं जैसे कोई नया नुस्खा हो। पचरंगा पापड़ की सफेदी, नमक की खुशबू और मसाले की हल्की झलक — सब एक ही छत पर मिल जाते हैं। पर जैसे ही कबूतर उतरता है या हवा झटका देती है, पूरा मोहल्ला यह देखने लगता है कि कौन सा पापड़ कोने तक फिसल गया। तब छत का दृश्य कार्यालय से कम नहीं लगता: एक जन पापड़ गिन रहा है, दूसरा डंडा ले आया है, और तीसरा बोल रहा है, “घणी तेज धूप है, बस अब काम बन गया।” सच्ची, जयपुर में रोटी से पहले पापड़ का भी अपना मौसम होता है।