पांच बत्ती की चाय और गिलास का हाथ मिलाना
पांच बत्ती पर चाय सिर्फ प्याली भर की बात नहीं, एक छोटा सा जयपुर हैंडशेक है। ठेले पर गिलास आता है तो पहले धूप, फिर भाप, फिर वह पकड़ जो सीधे दिल तक पहुँचती है। घणी तीखी चाय हो या हल्की इलायची वाली, गिलास को ऐसे थामा जाता है जैसे कार्यालय का कागज नहीं, घर की गरम रोटी हो। यहीं पर जयपुर का असली अदब दिखता है: उँगलियाँ गिलास की तपन समझ लेती हैं, और बात कम, मुस्कान ज़्यादा होती है। पांच बत्ती की इसी चाय ने कितने लोगों को सुबह जगाया, कितनों को शाम का विराम दिया — और सबसे खास, एक हाथ से गिलास पकड़ने की वह आदत जो आज भी शहर को पहचान देती है। सच्ची, जयपुर का हैंडशेक काफी गरम है।
