पंच बत्ती की चाय, बजट की बात
पंच बत्ती पर चाय की टपरी के आसपास घणी अजीब दुनिया चलती है। कोई पेट्रोल के दाम गिन रहा है, कोई ट्रैफिक का, और कोई अपने घर के बिजली के बिल का। पर जैसे ही कटिंग आती है, सबकी बात एक ही स्तर पर आ जाती है। चाय का प्याला आधा, पर राय पूरी। यहीं जयपुर की असली अर्थव्यवस्था की कक्षा है, जहाँ चाय ठंडी होने से पहले दो नए नुस्खे निकल आते हैं। एक आदमी कहता है, “भाई, इस बार तो बजट तंग है,” और दूसरा तुरंत बोलता है, “फिर कटिंग ही सही।” म्हारे जयपुर में बात लंबी नहीं, चाय छोटी होती है — पर उसी छोटे प्याले में शहर का सबसे बड़ा ज्ञान घुल जाता है। सच्ची, यही तो पंच बत्ती की पहचान है।
