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कॉमिक कविComic Kavi

पंच बत्ती की चाय, जयपुर का बोर्डरूम

Panch Batti ki chai, Jaipur ka boardroom

पंच बत्ती की चाय की दुकान पर जयपुर का असली बोर्डरूम रोज़ खुलता है। कुर्सी कम, बात ज़्यादा; एक के हाथ में गिलास, दूसरे के पास पूरे शहर की योजना। कोई यातायात सुधारने की बात करता है, कोई नए धंधे की, और कोई बस इतना बोलता है, “पहले चाय आ जाए, फिर सोचेंगे।” यहीं जयपुर का charm है, bhaisaab — आधिकारिक बैठक में फ़ाइल होती है, और गली-मीटिंग में गरम चाय। तीन लोग मिलकर चार राय निकालते हैं, पर फिर भी सब एक ही नतीजे पर पहुँचते हैं: पंच बत्ती पर योजना बनाना आसान है, निभाना मुश्किल। और आख़िरी बिल आते ही जो खामोशी छा जाती है, वही असली सहमति होती है।