पन्ना मीना का कुंड: खामोशी का जाल
पन्ना मीना का कुंड आमेर की उन जगहों में से है जहाँ नज़र पहले गिनती करती है, फिर सुकून महसूस करती है। सीढ़ियाँ एक-दूसरे में ऐसे जुड़ी हैं कि ऊपर से देखें तो ज्यामिति लगती है, और नीचे उतरें तो ठंडी हवा। सुबह के समय यहाँ बोलने पर आवाज़ दीवारों से टकराकर लौट आती है, इसलिए लोग अपने आप ही धीरे बोलते हैं। आमेर की गलियों से आने वाला मुसाफिर यहाँ थोड़ा रुक जाता है; घणी तेज़ चाल यहाँ चलती ही नहीं। म्हारे जयपुर में ऐसी जगह कम है जो बिना कुछ कहे भी इतना कह दे: कुएँ की सुंदरता सिर्फ पानी में नहीं, उसके खालीपन में भी होती है।
