पन्ना मीना का कुंड: कदम पर कदम, पोज़ पर पोज़
पन्ना मीना का कुंड देखते ही पहली बात यही आती है: भाई, यह कुंड है या स्कूल का ज्यामिति का समय? एक तरफ सीढ़ियाँ ऐसे मिलती हैं जैसे सबने मिलकर एक ही निशान पर पैर रखा हो, और हर पर्यटक का चेहरा बोलता है—बस एक सही फोटो और। फिर शुरू होता है असली खेल। ऊपर से नीचे उतरना आसान, पर कैमरे का कोण पकड़ना? घणी मेहनत। कोई बाएँ से झुकता है, कोई दाएँ से, और कोई सीढ़ियों पर खड़े होकर भी सीधी तस्वीर ढूँढता रहता है। जयपुर का यह कोना बस देखने का नहीं, पोज़ समझने का भी इम्तिहान है। और हाँ, अंतिम शॉट का राज 37 सीढ़ियों की गिनती में है—तभी जाकर वह मशहूर पैटर्न पूरा दिखता है।
