पन्ना मीना का कुंड: सुबह की रेखाएँ
सुबह पन्ना मीना का कुंड पर पहली नज़र सीढ़ियों की कतार पर जाती है। हर स्तर पर धूप अलग तरीके से गिरती है, और छत की दीवार से आती ठंडक पैरों तक उतर जाती है। पर्यटक कम हों तो जगह और भी साफ सुनाई देती है — पानी की हल्की आवाज़, नीचे बैठे लोगों की धीमी बात, और ऊपर खुला आसमान। यहीं जयपुर का वह रोज़ का सुकून दिखता है जो होटल के ब्रोशर से ज़्यादा असली लगता है। कुछ स्थानीय लोग सुबह की ठंड में यहाँ विराम लेते हैं, चाय या बस खामोशी के साथ। घणी सीढ़ियाँ, घणी शांति — सच्ची, शहर का दिल कभी-कभी इसी तरह धड़कता है। आज भी पन्ना मीना का कुंड का जादू उसकी ज्यामिति में नहीं, उसके ठहराव में है.
