पन्ना मीना का कुंड: सुबह की सीढ़ियाँ
सुबह पन्ना मीना का कुंड पहुँचो तो सबसे पहले रंग नहीं, रोशनी दिखती है। आमेर के पास बना यह बावड़ी-नुमा कुंड अपनी सीढ़ियों की अनोखी सजावट से नहीं, उनकी गिनती से याद रहता है। एक तरफ उतरती, दूसरी तरफ चढ़ती, और बीच में पानी का शांत चेहरा—जैसे जयपुर ने अपनी बात बिना शोर के कही हो। घणी सुबह में यहाँ भीड़ कम होती है, तो पत्थर की ठंडक और दीवारों की रेखा और साफ दिखती है। कभी लगता है इन सीढ़ियों ने कितने लोगों के पैर संभाले होंगे—पानी भरने वाले, रुकने वाले, बस देखने वाले। म्हारे जयपुर में ऐसे कोने अब भी बताते हैं कि खूबसूरती सिर्फ महलों में नहीं, रोज़ की मेहनत और सोच में भी होती है।
