पटवों की हवेली: जाली पत्थर का जादू
जैसलमेर की पटवों की हवेली सिर्फ इमारत नहीं, एक खुली हुई कला की किताब है। पीले बलुआ पत्थर पर बनी महीन नक्काशी, पतले झरोखे और गहरे पट्टे रेगिस्तान की धूप में भी नरम लगते हैं। पाँच हवेलियों का यह समूह अपनी बारीक कारीगरी के लिए जाना जाता है, और हर दीवार पर हाथ की मेहनत साफ दिखती है। यहाँ छत की छाया, खिड़की की जाली और दरवाज़े के किनारे तक में नक्काशी भरी है। पटवा बनियों के इस परिवार ने व्यापार के साथ सुंदरता भी बचाकर रखी। म्हारे जैसलमेर में ऐसी नक्काशी देखकर लगता है पत्थर भी बोल उठता है—बस सुनने वाला कान चाहिए। खैर, इसी वजह से यह हवेली किले-शहर को एक कला-दीर्घा जैसा बना देती है।
